कृत्रिम वर्षा प्रणाली से लाभ में वृद्धि

कृत्रिम वर्षा प्रणाली से लाभ में वृद्धि


बारिश का समय पर ना होने वाली समस्याओं को लेकर आए दिन किसान परेशान रहते हैं उसके समाधान के लिए कृत्रिम वर्षा पद्धति एक बहुत अच्छा विकल्प है शिमला से वर्षा की समस्याएं का निदान होता है साथ ही खेत में होने वाली फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियों से भी बचा होता इसके साथ पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है व फसल की अच्छी और स्वस्थ रहती है इससे किसान की आय में बढ़ोतरी होती हैं



कृत्रिम वर्षा या फिर फव्वारा द्वारा सिंचाई पद्धति या आप इसे ड्रिप इरिगेशन सिस्टम के नाम से भी जानते हैं इसका उपयोग आप सही तरीके से करें तो आपको बहुत अच्छा मुनाफा मिलेगा और आप की फसल की पैदावार अच्छी होगी और कहीं रोगों से बचाव होगा और कम खर्च में अधिक मुनाफा ले पाएंगे लागत में भी कमी आती है और कम पानी के उपयोग से अधिक से अधिक दवा ले सकते हैं

सरकार भी इसमें अनुदान दे रही है जिससे किसानों की मदद हो सके और देश में आ रही सानू की समस्याओं का समाधान हो सके

कहा करें प्रयोग

वैसे तो कृत्रिम वर्षा पद्धति का उपयोग हम सभी फसलों में कर सकते हैं तू हम उनका कंद वाली फसलों में प्रयोग करें तो अच्छा मुनाफा होता है इससे जमीन भुरभुरी बनी रहती हैं और कंद के विकास में यह बहुत जरूरी है और वातावरण में नमी भी बन जाती है और कम पानी के उपयोग से पानी की भी बहुत बचत होती है जिन स्थानों पर किसानों के पास पानी की कमी रहती है उन स्थानों पर आप इनका उपयोग कर सकते हैं इसका उपयोग करने से 10 से 15% तक उपज में ईजाफा होता है

इस विधि के फायदे

परंपरागत तरीकों से सिंचाई करने और प्रतिवर्ष आयोजित सिंचाई करने में 50 से 70% जल की बचत होती है जमीन के समतलीकरण करने की भी कोई आवश्यकता नहीं होती इससे हर तरह के दो भागों में खेती की जा सकती है हमें प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर रहने की भी आवश्यकता नहीं होती समय की बचत होती है और फसल की गुणवत्ता भी अच्छी होती है कई बीमारियां और कीड़े मकोड़ों से फसल को नुकसान नहीं हो पाता क्योंकि प्रति वर्ष से ऊपर से मिलती रहती है इससे कीड़े मकोड़े स्पर्श नुकसान नहीं पहुंचा पाते इसका उपयोग सारी फसलों में किया जा सकता है कंद वाली फसलों में कंद का विकास भी अच्छा होता है और घुलनशील खाद को भी हमेश पद्धति के द्वारा फसलों पर छिड़काव कर सकते हैं जिससे समय और मेहनत की बचत होती है और लागत में भी कम है उपज को भी बढ़ाता है जिन स्थानों पर किसान पानी की कमी के कारण खेती नहीं कर पाते वहां पर भी इसका उपयोग किया जा सकता है और कम पानी के उपयोग के साथ आप ज्यादा फसलों को पानी पिला सकते हैं कम पानी से ही आपकी आपूर्ति हो जाएगी घुलनशील खादो को भी इसके द्वारा छिड़काव किया जा सकता है जिससे हमें खेत में जाकर छिड़काव करने की आवश्यकता नहीं होती और कम समय में ज्यादा काम हो जाता है






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