कम मेहनत में अधिक मुनाफा जैविक अश्वगंधा की खेती से

कम मेहनत में अधिक मुनाफा जैविक अश्वगंधा की खेती से


अश्वगंधा एक औषधि फसल है जिस की खेती भारत में ठंडे प्रदेशों को छोड़कर सभी स्थानों पर की जा सकती है अश्वगंधा की खेती साल में तीनों मौसम में की जा सकती है यह 4 महीने की नकदी फसल है मुख्य तहसील खेती मध्यप्रदेश व राजस्थान के कुछ जिलों में की जाती है जिसमें से मंदसौर और नीमच प्रमुख है कहीं और भी गुणों के होने के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है उसका उपयोग करें दवाइयों और चमनप्राश जैसी चीजों को बनाने में किया जाता है



आइए हम बात करें वर्षा ऋतु में अश्वगंधा की खेती की

अश्वगंधा की खेती के लिए जमीन में अच्छी नामी और मौसम अच्छा सुस्क होना चाहिए अश्वगंधा को अच्छी तरह बारिश हो जाने के बाद बोया जाता है जिससे मिट्टी शुष्क हो जाए जो अश्वगंधा की जड़ों का विकास अच्छा होता है और पैदावार भी अच्छी होती

खेत की तैयारी

खेत को तैयार करने के लिए हीरो या देशी हल से इसकी अच्छी तरह जुताई कर ले और खेत का समतलीकरण भी कर ले ध्यान रखें कि जल निकासी की उत्तम व्यवस्था हो पानी भरने पर फसल खराब हो सकती है और गोबर की अच्छी साड़ी खाद को बिछड़कर रोटावेटर की सहायता से से मिला ले जिससे मिट्टी भुर भुरी हो जाएगी

बोने की विधि

बीच को बोलने से पहले उसकी अच्छी तरह किसी जैविक फंगीसाइड से उपचारित कर ले उसके बाद छिड़काव द्वारा बीजों को बोया जाता है एक एक पेड़ में करीब 5 से 6 किलो बीज तक का उपयोग किया जा सकता है और किसी उपकरण की सहायता से मिट्टी को किस का ध्यान रखें बीच 2 से 3 सेंटीमीटर से अधिक घराना हो 15 दिनों बाद बीजों में अंकुरण हमें लगता है अच्छी पैदावार के लिए मिनी स्प्रिंकलर का उपयोग करें वाह आप इसे सिंचाई के द्वारा भी पानी दे सकते हैं

सिंचाई व खाद देने का समय

वर्षा ऋतु में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है अश्वगंधा कम पानी की फसल है अगर वर्षा समय पर ना हो तो दो या तीन सिंचाई कर सकते हैं या मिनी स्प्रिंकलर से भी आप इसकी सिंचाई कर सकते हैं जैसा कि हम ने बताया कि तैयार करते वक्त जी आप गोबर की सड़ी खाद उपयोग में लाकर खाद की मांग को पूरा कर सकते हैं वह और अधिक अच्छी पैदावार के लिए आप इस पर पोटाश के स्प्रे कर सकते हैं या पोटाश बैक्टीरिया का भी उपयोग कर सकते हैं जिससे जड़ों का विकास अच्छा होगा समय-समय पर नींद आएगी उड़ाई करते रहें आप अच्छी पैदावार के लिए फास्फोरस भी दे सकते हैं

कीटों से बचाव

अश्वगंधा पर पैसे तो सीटों का कोई प्रभाव नहीं होता है और कोई जंगली जानवर भी इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचाते तो इसके लिए आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है

अश्वगंधा उत्पाद

फसल बुवाई के 4 महीने वादिया डेढ़ सौ से 170 दिन में तैयार हो जाती है अश्वगंधा प्रति एकड़ 3-4 कुंटल तक जड़े निकल जाती है वह इसका का ताना भी बिकता हैअश्वगंधा की सारी चीजें दिखती है इसके बीज भी लिखते हैं और तनाव और जड़े भी अलग-अलग करके भेजी जाती है

कैसे निकाले

अश्वगंधा को खेत से उसकी जड़ों को निकालकर तने और चढ़े को कुल्हाड़ी की सहायता से काट लें और अच्छी तरह सूखा ले सूखे हुए जड़ों को अलग रखें और और अनेकों गई सुखाकर थ्रैशर मशीन की सहायता से बारीक कर ले अब आप इसे बाजार में बेच सकते हैं जड़ों का एक अनुमानित भाव 20000 से 50000 तक होता है और चने का भाव 1500 से 11000 तक बिक जाती है ज्यादा मेहनत ना होने के कारण किसानों को एक बहुत अच्छे आमदनी दे सकते हैं





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