मशरूम की खेती

मशरूम की खेती


मशरूम की खेती की खास बात यह है कि इसकी खेती हम साल भर तक कर सकते हैं पिछले कुछ वर्षों में शहरी किसानों का रुझान मशरूम खेती की तरफ बढ़ा है मशरूम की बेहतर आमदनी होने के कारण युवा किसान इसकी तरफ ध्यान दे रहे हैं बाजार में इसका अच्छा धाम भी मिल जाता है और से शहरों में युवा किसान मशरूम की खेती करा एक अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं साथ ही इसकी लागत कम होने की वजह से समय और जगह की कम आवश्यकता होने से और मुनाफा ज्यादा मिलने से फिर किसानों को एक अच्छा आएगा स्त्रोत प्रदान करते हैं



हमारे देश में मशरूम

हमारे देश में मशरूम का उपयोग भोजन और औषधि के रूप में किया जाता है प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स और विटामिन जैसे उच्च खाद्य मूल्यों के कारण मशरूम संपूर्ण विश्व में एक विशेष महत्व रखता है भारत में मशरूम की खेती के लिए सरकार भी अनुदान दे रही है और कृषि विश्वविद्यालय में इसका परीक्षण किया जा रहा है ताकि किसान अपनी आय बढ़ा सकें

सबसे ज्यादा प्रचलित भारत में सफेद बटन मशरूम की खेती पहले निम्न तापमान वाले स्थानों की जाती थी पर आजकल ऐसे तकनीक से लोग तापमान को नियंत्रित कर 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड और 70 से 90% सांद्रता पर अच्छी पैदावार ले रहे हैं मशरूम को उगाने के लिए गेहूं धान के मुसलमानों का इस्तेमाल किया जाता है मशरूम 75 से 90 दिन में तैयार हो जाता है उसका उत्पादन पूरे भारत में हो रहा है 10 कुंटल मशरूम उगाने के लिए कुल खर्च ₹50000 तक आ जाता है इसके लिए 100 वर्ग फीट के कमरे में लगानी होती है वर्तमान में आयस्टर मशरूम ₹120 किलो से लेकर 1000 तक की दर से बाजार में बिक रहा है उत्पादन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है अच्छा दिला सकता है

मशरूम उत्पादन के लिए सेट तैयार करना

छोटे किसान कम लागत में बांस और धान की वालों से बने सेठ का प्रयोग कर सकते हैं बांस और धान की पराली से स्लिप तैयार की जा सकती हैं

कंपोस्ट तैयार करना

दस किलो भूसे को 100 लीटर पानी में भिगोया जाता है, इसके लिए 150 मिली. फार्मलिन, सात ग्राम कॉर्बेंडाजिन को पानी में घोलकर इसमें दस किलो भूसा डुबोकर उसका शोधन किया जाता है। भूसा भिगोने के बाद लगभग बारह घंटे यानि अगर सुबह फैलाते हैं तो शाम को और शाम को फैलाते हैं तो सुबह निकाल लें, इसके बाद भूसे को किसी जालीदार बैग में भरकर या फिर चारपाई पर फैला देते हैं, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है सूखे भूसे को एक बैग में भरा जाता है, बैग में तीन लेयर लगानी होती है, एक लेयर लगाने के बाद उसमें स्पॉन की किनारे-किनारे रखकर उसपर फिर भूसा रखा जाता है

मशरूम उगाना

बटन मशरूम को निम्न तापमान में रखना होता है जिसके लिए ग्रीन हाउस का भी उपयोग किया जा सकता है अच्छी गुणवत्ता का मशरूम उगाने के लिए इसका बीज किसी अच्छी भरोसेमंद दुकान से ही लेना चाहिए खूमभी एक अच्छी प्रजाति है बीज 30 दिन से ज्यादा पुराना ना हो इस बात का भी ध्यान रखें और इस बात का भी ध्यान रखें कि कमरे में पर्याप्त नमी हो फर्श को साफ पानी से गिला रखें और दीवारों पर भी पानी का छिड़काव कर कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड ही होना चाहिए स्कोर कंपोस्ट के साथ मिलाकर रख दे और पानी का छिड़काव करें ध्यान रखें 15से 25 दिनों में कुंडली का कवर जाल पूरी तरह से कम पोस्ट में तेरी जाए और इसमें हिंदी को ताजी हवा मिलती रहना चाहिए

मशरूम की तुड़ाई

मशरूम को बोलने के 40 से 45 दिन बाद इसकी बटन बनने लगती है पप्पू से काटकर साफ करके अपडेट कर सकते हैं और साफ सफाई पर अधिक से अधिक ध्यान दें इससे आपको इसका अच्छा मुनाफा मिल सके

कहां बेचे

वैसे तो आजकल मौसम की काफी मांग है पर आप इसे होटल और रेस्तरां में भी बेच सकते हैं जो मशरूम की स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं जिससे आपको अधिक मुनाफा होगा वह आपके ग्राहक आप से जुड़े रहेंगे






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